Friday, October 24, 2014

तो क्या अब फिर से इंडिया गेट और राजपथ पर प्रदर्शन करना पडेगा? लगता तो ऐसा ही है कि बिना आंदोलन सिस्टम हिलता ही नहीं है। फिर चाहे पिंकी मरने से पहले खुद ही क्यूं न बता गई हो कि किसने मारा और कैसे मारा। अब तो दीवाली मनाने पर भी शर्म आ रही है,...जब से ये विडियो देखा है लग रहा है पाप हो गया इस बार दीेये जला कर।


जिस वक्त हम पिंकी की मौत को एक और हादसा समझ कर दीवाली की अपनी खुशियों में डूब गये थे तब ग़म में डूबा पिंकी का परिवार इस वीडियो को फेसबुक पर अपलोड कर हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश में लगा था। लेकिन हम शायद तब दीवाली की खुशियों में डूबे थे और अब छुट्टी खत्म होने पर अपने काम पर वापस लौटने की हड़बडी में हैं। तभी तो जिस सोशल नेटवर्किंग पर रातों रात किसी वीडियो को लाखों हिट मिल जाया करते हैं,... वहां बेचारी पिंकी की दर्द भरी आवाज़ तीन दिन में महज़ कुछ सौ लोगों तक पहुंच पायी है। बात बात पर तो वीडियो शेयर करने का चलन है हमारे यहां.....फिर इस बार क्या हो गया 'यंग जनरेशन' को? मुझे लगता था बुजुर्गों को क्या पता कि वक्त बदल गया है लेकिन मैं ग़लत था और हर वो बुजुर्ग सही जिसने हमेशा चर्चाओं में मुझसे ये कहा कि ' बेटा आंदोलन बार बार नहीं हुआ करते'

किसी और की तरफ क्यूं उंगली उठाना जब अपना ही सिक्का खोटा हो। बात बात पर बात का बतंगड बनाने वाले मीडिया चैनल भी तो पटाखे ही फोड रहे थे। शायद मीडिया के बने बनाये सिद्धांत यही कहते हैं कि शोर में एक व्यक्ति की आवाज़ को ज्यादा तवज्जों नहीं दी जाती। बहुमतवाद जो है हमारे समाज में.......

खैर अब दीवाली खत्म हो गयी तो कुछ लोगों को शायद ध्यान आये कि पिंकी उनकी बेटी भी हो सकती है....और अगर आज आप पिंकी के परिवार के साथ खडे नहीं हो सकते तो फिर उम्मीद मत कीजिएगा कि आपके परिवार में कुछ ऐसा होने पर कोई आपके दरवाजे आएगा। इस वीडियो को देखकर आपके जहन में उठ रहे बाकी तमाम सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे फिर थोडी सी गैरत उभर आए तो अपने दोस्तों से भी शेयर कर लीजिएगा....क्योंकि शेयर करना तो चलन है हमारे समाज का।

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