Tuesday, February 5, 2013

मेरे दर्द को....इनाम मिला, इंसाफ नहीं।




मेरी पहली पुस्तक आपके समक्ष है। 'मरे दर्द को.... इनाम मिला, इंसाफ नहीं' एक बहादुर शिक्षिका के जीवन की, और उसके लिए इंसाफ की लडाई लड़ते उसके परिवार की कहानी है। ये पुस्तक सच्ची घटना पर आधारित है। सुशील कुमारी का अपहरण कर उसकी हत्या महज़ इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने राजनैतिक रसूख वाले लोगों के दवाब में आकर बोर्ड परीक्षा में एक छात्रा को नकल करवाने से इनकार कर दिया था। दो दशक की कानूनी लड़ाई के बाद भी सुशील कुमारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला है....हां, उनके दर्द को कुरेदने के लिए सरकार ने दो दशक बाद राज्य के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक को सुशील कुमारी स्मृति पुरस्कार का एलान ज़रुर कर दिया है।

Thursday, January 31, 2013

उसके हाथों मौत भी मिले तो मेरा नसीब है


दिल की उन हरकतों से अब दूर से हो गए हैं

शायद ज़िंदगी की राहों में मजबूर से हो गए हैं

अब अक्स कोई दिल को भटकाता नहीं है

शायद मुहब्बत में उसकी बा-सुरूर हो गए हैं।

 

कभी महफिल में रह कर भी तन्हा से थे

अब उसके आगोश में हर रंग नसीब है

गहराते हैं मेरी सोच के काले समंदर

लेकिन हर भंवर में वो हमेशा करीब है

 

गर खो भी जाऊं हरपल बदलती राहों में

सुकून बस इतना रहेगा कि मंज़िल करीब है

क्या हुआ जो कहने से अब डरने लगा हूं

उसके हाथों मौत भी मिले तो मेरा नसीब है